बहोत हो चुका - बैठे रेहना किनारे पर
बहोत हो चुका - बैठे रेहना किनारे पर
मन की ये हलचल जैसे समंदर का कोलाहल
लेहरे इतनी भीषण जैसे मेरे दिल की तेज धडकन
भव्यता इतनी कि मानो निगलले सुरज को भी
ताकद मेरे ख्वाब मे इतनी की बदलदे किस्मत को भी
वक्त आ गया है अब - -
छल्लांग लगाने का!
गेहराईयो को छू कर
आसमान तक पोहोचनेका
बहोत हो चुका - बैठे रेहना किनारे पर
- सतेज
19 मै 2022
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